माखन वंश के गौरव

 माखन वंश के गौरव


श्री सूरजदीन साव, लंबरदार

सूरजदीन साव 

  • पिता - श्री बलभद्र साव, मालगुजार और लंबरदार माखन वंश
  • जन्म - संवत् 1964
  • शिक्षा - मध्यमा द्वितीय खंड (बनारस)
  • सदस्य - तहसील कांग्रेस एवं डिस्ट्रिक्ट कांउसिल
  • अध्यक्ष - क्षेत्रीय केसरवानी वैश्य समाज

सन् 1937 में कसडोल विधान सभा के अंतर्गत ग्राम हसुवा में तहसील परिषद का आयोजन हुआ था।

शिवरीनारायण में क्षेत्रीय केसरवानी वैश्य समाज का अधिवेशन हुआ था।

भाई-बहन श्री कृपाराव साव, श्री चद्रिकाप्रसाद साव, श्री सूरजदीन साव, विद्याधर साव एवं बहन भूलन बाई एवं बुलाकी बाई

    माखन वंश में सर्वाधिक गांव की खरीदी और डिग्री माखन वंश के मालगुजार और लंबरदार श्री आत्माराम सूरजदीन साव के समय में हुआ। माखन साव के आठ गांव की मालगुजारी चैरासी गांव तक पहुंच गई। वे धीर, गंभीर, धार्मिक और शांत चित्त व्यक्ति थे। उनका व्यक्तित्व बड़ा प्रभावशाली था। उनके इसी व्यक्तित्व से प्रभावित होकर हसुवा परिवार से उनके पिता और संयुक्त लंबरदार श्री बलभद्र साव की मृत्यु 13. 04. 1926 के बाद माखन वंश की केंद्रिय इकाई शिवरीनारायण का मालगुजार एवं लंबरदार बनाया गया। इसी प्रकार उनके ज्येष्ठ भ्राता श्री चंद्रिका प्रसाद साव को हसुवा का लंबरदार नियुक्त किया गया था। उन्होंने माखन वंश में तीन पीढ़ी तक लंबरदारी की है। वे आत्माराम साव सूरजदीन साव, श्याममनोहर साव सूरजदीन साव और अंतिम लंबरदार तुमागम प्रसाद सूरजदीन साव के साथ लंबरदारी की। उनका पंडित रविशंकर शुक्ल एवं उनके परिवार से मृत्यु पर्यन्त तक सम्बंध बना हुआ था। सारंगढ़ के राजा जवाहर सिंह, राजा नरेश सिंह, रायगढ़ के राजा नटवरसिंह, राजा चक्रधर सिंह, दूधाधारी एवं शिवरीनारायण मठ के महंत लक्ष्मीनारायण दास (रायपुर), महंत लालदास एवं महंत वैष्णवदास, अकलतरा जमींदार परिवार एवं बैरिस्टर छेदीलाल, चांपा जमींदार, बिलाईगढ़ कटगी जमींदार, भटगांव जमींदार आदि के साथ मधुर सम्बंध था और प्रायः उनके साथ नियमित बैठकें हुआ करती थी। उनके नेतृत्व में समाज के न जाने कितने परिवार को टूटने से बचाया और शांति पूर्वक आपसी बंटवारा भी कराया। उनके चार पुत्र क्रमशः श्री पराऊराम, श्री बाबुलाल, श्री रेशमलाल (अविवाहित मृत) एवं श्री रामकुमार अविवाहित मृत) थे। वे नियमित तीन बार कंठस्थ गीता और गजेन्द्र मोक्ष का पाठ करते थे।  भतीजा श्री देवालाल की असामयिक मृत्यु हो जाने से अत्यंत व्यथित हो गये थे।

मृत्यु - 28. 08. 2001 मंगलवार को बिलासपुर के अस्पताल में निधन हो गया और उनका दाह संस्कार 29 अगस्त 2001 को शिवरीनारायण में किया गया।


श्री तिजाऊप्रसाद केशरवानी

तिजाऊप्रसाद और भानी बाई 

माखन वंश के सफलतम मालगुजार और लंबरदार श्री आत्माराम साव के कनिष्ठ भ्राता लक्ष्मण उर्फ खम्हारी साव के तृतीय पुत्र श्री तिजाऊप्रसाद हुए। वे धीर, गंभीर और शांतचित्त व्यक्ति थे। वे परिवार को साथ लेकर चलते थे। उन्होंने अपने सभी भाईयों के परिवार को साथ लेकर चलते रहे। ‘‘श्री साव स्टोर्स‘‘ के रूप में मनिहारी और पुस्तक दुकान का भाईयों और भतीजों के साथ सफल संचालन करते थे। दीपावली के समय फटाके की अलग दुकान लगाते थे। इसी प्रकार शिवरीनारायण के माघी मेला में अलग दुकान मेला स्थल में और पीथमपुर मेला में लगाते थे जिसमें उनका भतीजा श्री देवालाल निःस्वार्थ सहयोग करते थे। दुकान के समान लाने के लिए बिलासपुर और कलकत्ता भी जाते थे। पूरे क्षेत्र में श्री साव स्टोर्स का खूब नाम था। सबको विश्वास था कि यहां सही और उचित मूल्य पर समान मिलता है। शाम को गांव के बुद्विजीवी लोग यहां आकर पेपर पढ़ते और गांव के विकास पर चर्चा करते थे। नियमित चर्चा करने वालों में श्री गोवर्धन शर्मा, श्री बजरंग केडिया, श्री देवालाल, श्री गणेश प्रसाद नारनोलिया, श्री उदित सुल्तानिया, श्री अयूब खां, श्री सेवकराम श्रीवास और श्री बृंदा प्रसाद केशरवानी आदि थे।

सन् 1967 में श्री तिजाऊप्रसाद को शिवरीनारायण के ग्राम पंचायत का सरपंच चुना गया। घर परिवार और दुकान के साथ ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी से उनका जीवन व्यस्त हो गया। पंचायत के काम से उन्हें कभी जांजगीर और कभी बिलासपुर जिला मुख्यालय जाना पड़ता था। लेकिन उन्होंने आने जाने का खर्चा स्वयं वहन किया। उचित मूल्य की दुकान तब अलग से नहीं था, वे उचित मूल्य का राशन (कंट्रोल) का वितरण पंचायत भवन में समय निकालकर राशन कार्ड के हिसाब से स्वयं देते थे। पंचायत के काम में किसी प्रकार के कानूनी समस्या न आये इसके लिए वे जांजगीर में श्री गौंटियाराम केशरवानी और बिलासपुर में श्री जगदीश प्रसाद केशरवानी (दोनों उनके भतीजा थे) से लेते थे कदाचित् इसी कारण उन्हें कभी कानूनी समस्या नहीं आई। उन्होंने शासन की योजनानुसार शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शिवरीनारायण में अतिरिक्त कमरों का निर्माण कराया। श्री गणेश प्रसाद नारनोलिया के सहयोग से शासकीय कन्या प्राथमिक शाला शिवरीनारायण में खुलवाया जो उनके गोदाम में लगता था और आगे चलकर ये शासकीय उच्चतर माध्यमिक कन्या विद्यालय के रूप में बोर्डिंग हाउस भवन में लगने लगा। यहां भी अतिरिक्त कमरों का निर्माण शासकीय योजनानुसार बनवाया गया। महाराष्ट्र से महानदी के रेत में तरबूज की खेती करने के लिये किसानों को आमंत्रित किया गया। शिवरीनारयण में नियमित सब्जी बाजार लगाने की पहले निःशुल्क व्यवस्था की गई जिसमें आस पास के सब्जी विक्रेता आते थे। जब सब्जी बाजार नियमित और अच्छे से लगने लगा तब उसमें टैक्स लगाया गया जिससे ग्राम पंचायत की आमदनी बढ़ने लगी। सन् 1967 में ही यहां बिजली आई और गली, चैराहों में बिजली खम्भों में पहले बल्ब और बाद में मरकरी बल्ब लगा जिससे चारों ओर रोशनी होने लगी। वे मृदुभाषी और उनके हर प्रकार के सहयोग करने के कारण घर परिवार के झगड़ों को निपटाने जनता के घर जाना पड़ता था। उन्होंने अपने सहयोगियों के सहयोग से गांव के अनेक परिवार को टूटने से बचाया। उनका पांच वर्ष का कार्यकाल सफल रहा और जनता उनके कार्यों से खुश थी। 

उन्हें दूसरे कार्यकाल के लिए ग्राम सरपंच निर्विरोध चुना गया। प्रतिवर्ष महानदी में आने वाली बाढ़ से निचली बस्ती के लोगों को नुकसान होता था। सन् 1970 और 1980 में महानदी में खूब बाढ़ आने से मुख्य बाजार और बस्ती में पानी घुस आया जिससे बहुत नुकसान हुआ। महानदी के तट पर हर साल बाढ़ से कटाव बढ़ते जाता है। ऐसा ही मेला ग्राउंड के पास बहुत बड़े गड्ढे से बाढ़ का पानी बस स्टैंड होते बस्ती को घेर लेता है। इसी प्रकार शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के पास के गड्ढे से महानदी का पानी बस्ती में घुस जाता है। ये बहुत बड़ी समस्या थी जिसे श्री तिजाऊ प्रसाद जी ने पत्थर का दीवार उठवाकर पटवाने का काम किया। मुख्य बाजार में पत्थर लगवाकर ऊंचा करवाया बाद में तत्कालीन मुख्य मंत्री श्री अर्जुन सिंह के बाढ़ प्रभावित लोगों के नुकसान के मुआयना करने आने के बाद प्रमुख बाजार और बिलासपुर रोड में सड़क बनवाने की घोषणा के बाद सड़कें बनने से बाजार ऊंचा हो गया। उन्हीं के कार्यकाल में श्री बल्दाऊ प्रसाद केशरवानी ने श्री प्रयागप्रसाद केशरवानी शासकीय अस्पताल बनवाया जिसमें श्री देवालाल केशरवानी ने बिजली लगवाया और मंत्री श्री चित्रकांत जायसवाल से डाॅक्टर, कम्पाउंडर, नर्स आदि की व्यवस्था करवाया। उनके रहने आदि की व्यवस्था कराया जिससे लोगों को सही ईलाज मिलने लगा। शिवरीनारायण एक मुख्य व्यापारिक नगर था जहां आस पास के लोग खरीददारी करने आते थे। अतः स्वाभाविक रूप से यहां का व्यापार बढ़ गया था। यहां गुरूवार को साप्ताहिक बाजार लगता था जिसमें क्षेत्र का बहुत बड़ा मवेशी बाजार भरता था। इसमें अनेक प्रकार के कृषि समाग्री बिक्री के लिये आता था। इस साप्ताहिक बाजार में टैक्स की वसूली जनपद पंचायत जांजगीर करती थी। आगे चलकर श्री तिजाऊ प्रसाद जी के अथक प्रयास से टैक्स वसूली का अधिकार शिवरीनारायण ग्राम पंचायत को मिल गया जिससे पंचायत की आमदनी बढ़ गई। उन्होंने स्कूल के सामने ग्राम पंचायत भवन और अन्य भवन का निर्माण कराया। ग्राम पंचालय भवन का उदघाटन तत्कालीन केबिनेट मंत्री श्री बिसाहूदास महंत के कर कमलों से हुआ था। व्यापारिक नगर होने के कारण यहां भारतीय स्टैट बैंक खुलवाने के प्रयास हुए और उसे भवन उपलब्ध कराये जाने के बाद बैंक खुल गया। जिससे लोगों को सुविधा बढ़ गई। शिवरीनारायण के विकास में मध्यप्रदेश के मंत्री श्री बिसाहूदास महंत, श्री वेदराम कुर्रे, श्री रामाचरण राय, श्री चित्रकांत जायसवाल और केंद्रीय मंत्री श्री विद्याचरण शुक्ल का अमूल्य सहयोग मिला। आये दिन उनसे सहयोग लेने और यहां के विकास कार्यो की स्वीकृति के लिए श्री देवालाल केशरवानी को भोपाल भेजा जाता था जिसमें वे सफल होकर ही लौटते थे। कहना अनुचित नहीं होगा कि आज शिवरीनारायण विकास के जिस पायदान पर है उसकी मजबूत नींव श्री तिजाऊप्रसाद के कार्यकाल में रखी गई थी। श्री तिजाऊ प्रसाद जी सन् 1967 से 1977 तक सरपंच रहे। उन्होंने ग्राम पंचायत को नगर पंचायत का दर्जा दिलाने का प्रयास किया जिसमें वे सफल हो गये और शिवरीनारायण नगर पंचायत बन गया। मगर प्रथम अध्यक्ष श्री विजयकुमार तिवारी को मनोनित किया गया। नगर पंचायत में जनता के अनुरोध पर पार्षद वे जरूर बने मगर अध्यक्ष बनने से मना कर दिये। कदाचित् इसी कारण उन्हें जनता का मान सम्मान खूब मिला। वे 01 जनवरी 1914 को स्वर्ग सिधार गये। उनके पुत्रगण सुभाष कुमार, पुरूषोत्तम कुमार और जितेन्द्र कुमार शिवरीनारायण में व्यवसाय करते हैं। श्री तिजाऊप्रसाद के दो बड़े भाई श्री साहेब लाल और श्री मदनलाल, दो छोटे भाई पुनीराम तथा छोटेलाल थे जबकि दो भाई श्री टहकूराम और श्री बद्रीप्रसाद अविवाहित स्वर्गवासी हो गये थे। उनकी एक बहन थी जो बिर्रा ब्याही थी। निश्चित रूप से वे माखन वंश ही नहीं बल्कि नगर के गौरव थे। 


श्री गोरेलाल केशरवानी

गोरेलाल 

    31 जुलाई 1947 को जन्में श्री गोरेलाल, श्री लखन साव के कनिष्ठ पुत्र थे। वे रायगढ़ में चकबंदी इंस्पेक्टर के रूप में पदस्थ थे। उनके बड़े भाई श्री बल्देवप्रसाद हसुवा में रहकर कृषि कार्य कर रहे थे। बाद में श्री गोरेलाल नौकरी से इस्तीफा देकर हसुवा लौट आये और भाई के साथ कृषि कार्य में हाथ बंटाने लगे। वे मृदुभाषी, व्यवहार कुशल और सबको सहयोग देने थे जिससे गांव के किसान उनसे हमेशा खुश रहते थे। ग्रामीणजनों के अनुरोध पर वे सन् 1977 में हसुवा ग्राम पंचायत के सरपंच बने। तब हसुवा बिलाईगढ़ ब्लाॅक और तहसील के अंतर्गत था। आवागमन के लिए कसडोल, बलौदाबाजार होकर रायपुर तथा गिधौरी होकर सारंगढ़ जाने का सड़क मार्ग था जिसमें बसें चलती थी। श्री गोरेलाल गांव के सरपंच ही नहीं थे बल्कि सबके लिये न्याय पालिका के मुखिया भी थे। आये दिन ग्रामीणों में विवाद, झगड़े आदि होते थे जिसका निपटारा वे करते थे जो सबको मान्य होता था। थाना और कोर्ट कचहरी तक मामला नहीं पहुंचता था। वे पहले 1977 से 1982 तक तथा 1982 से 1987 तक निर्विरोध सरपंच थे। एक बार मैं हसुवा के उपर एक फीचर बनाते समय उनसे साक्षात्कार में पूछा था कि हसुवा बिलाईगढ़ थाना और तहसील के अंतर्गत है, जो इस गांव से काफी दूर है और वहां जाने आने में सबको परेशानी होती है, तो आप गांव के मुखिया होने के नाते पास में स्थित कसडोल थाना के अंतर्गत हसुवा को सम्मिलित करने के लिए मांग क्यों नहीं करते ? जबकि आपका मंत्री श्री कन्हैयालाल शर्मा से बहुत अच्छा और पारिवारिक सम्बंध है। तब उन्होंने जवाब दिया था कि बिलाईगढ़, हसुवा से दूर है इसलिये यहां के झगड़े थाना और कचहरी तक नहीं पहुंच पाते और यहीं आपस में सुलझा लेते हैं। अगर पास में थाना और कचहरी हो तो घर के झगड़े वहां तक जायेंगे और छोटे छोटे किसान कोर्ट कचहरी के चक्कर में बर्बाद हो जायेंगे। मुझे उनका ये तर्क उचित लगा। कदाचित उनके कार्यकाल में हसुवा के ग्रामीणजन खुश और सुखी थे। उनके सरपंच रहते हसुवा से ग्रामीण जनों का एक भी दीवानी और फौजदारी केस नहीं बना। क्योंकि सभी श्री गोरेलाल जी के निर्णय से संतुष्ट हो जाते थे। यह गांव के लिये बहुत बड़ी उपलब्धि थी। अगर उनके भाई श्री बाबुलाल केशरवानी स्वयं सरपंच बनने की इच्छा नहीं रखते तो आगे भी श्री गोरेलाल जी सरपंच बने रहते। अंत में वे अपने बेटों के साथ कभी रायपुर और कभी बिलासपुर में रहते हुए अपोलो अस्पताल में 07 दिसंबर 2003 को हृदयघात से उनकी मृत्यु हो गई। उनका दाह संस्कार हसुवा में 08 दिसंबर 2003 को किया गया। उनके पुत्रगण क्रमशः रविन्द्र कुमार और राजेश कुमार बिलासपुर में तथा राकेश कुमार रायपुर में नौकरी करते हैं।


श्री बाबुलाल केशरवानी

बाबुलाल 

माखन वंश के लंबरदार श्री सूरजदीन साव के कनिष्ठ पुत्र श्री बाबुलाल थे। उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करके कसडोल के सहकारी समिति में नौकरी करने लगे। लेकिन वे ज्यादा दिन नौकरी नहीं किये और नौकरी छोड़कर हसुवा आ गये। बाद में वे श्री गोरेलाल केशरवानी के बाद सन् 1988 से 2005 तक हसुवा के सरपंच रहे।  इस प्रकार 17 वर्ष तक वे हसुवा के सरपंच रहे। आगे चलकर वे परिवार के साथ शिवरीनारायण रहने लगे और 15 मार्च 2015 को उनका निधन हो गया। उनके पुत्र अरविंद कुमार और गिरीश कुमार शिवरीनारायण में व्यवसाय करते




श्री साधराम साव

साधराम साव और बुलाकी देवी 

श्री साधराम साव अपने चाचा श्री रामचंद्र साव के साथ लखुर्री की मालगुजारी बहुत अच्छे से चलाने लगे। वे कृषि कर्य की देखरेख करते और चाचा श्री रामचंद्र महाजनी कार्य करते थे। इस क्षेत्र में श्री साधराम रामचंद्र साव का नाम बहुत ही आदर के साथ लिया जाता है। शिवरीनारायण बैल गाड़ी से जाने में बहुत समय लगता था जिससे कारण तालदेवरी में एक मकान बनवाया गया जिसमें रूकने, खाने पीने आदि के लिए नौकर चाकर की पूरी व्यवस्था की गयी थी। इसी प्रकार जांजगीर तहसील मालगुजारी के कार्य से आने जाने और बीच में विश्राम करने के लिए सोंठी में एक मकान बनवाया गया था और जिसे आगे चलकर कुष्ठ आश्रम खोलने के लिए सदाशिव राव कात्रे को दान कर दिया गया। इसी प्रकार बिलासपुर में माखन वंश के बच्चों के रहकर पढ़ने के लिए जुना बिलासपुर में घर लिया गया था। श्री जगदीशप्रसाद केशरवानी के पढ़कर लौटने और वहां रहकर प्रेक्टिस शुरू करने की बात पर श्री श्यामलाल साव ने वहां से बच्चों को निकाल दिया। तब श्री रामचंद्र साव ने लखुर्री खाते से बिलासपुर के गोंड़पारा में एक मकान खरीदा जिसमें रहकर इस वंश के बच्चे अपनी पढ़ाई पूरी किये। यहां की व्यवस्था के लिए नौकर चाकर की व्यवस्था थी। मालगुजारी और कोर्ट कचहरी के काम से बिलासपुर में रूकने के लिए इस घर में पर्याप्त व्यवस्था थी। पारिवारिक बंटवारा सम्बंधी झगड़े के निपटारे के लिए जब कोर्ट में केश काफी लंबा चला और लोग परेशान हो गये तब श्री साधराम साव ने आगे आकर केश का संचालन किया और सन् 1980-81 में ग्वालियर में आपसी राजीनामा पेश करके केश खत्म किया गया। इसी राजीनामें बंटवारा के आधार पर माखन वंश के लोग अपने अपने हिस्से में काबिज हैं। लखुर्री के श्री साधराम साव ग्राम प्रधान बनाये गये थे। उनकी सादगी, सत्यनिष्ठा, व्यवहार कुशलता और दानशीलता के सब कायल थे। मुझे खुशी है कि मेरे पिता श्री देवालाल श्री साधराम साव और श्री रामचंद्र साव दोनों के प्रिय थे और उनके हर छोटे बड़े काम में सहयोग करने के लिए तत्पर रहते थे। शादी व्याह के लिए यहां एक बहुत सुंदर और सजा हुआ डोला बनवाया गया था जिसे समय समय पर शिवरीनारायण भेजा जाता था।

श्री रामकृष्ण केशरवानी, लखुर्री

रामकृष्ण , सरपंच 

त्रिवेणी बाई 
लखुर्री परिवार के श्री दशरथ साव के पौत्र, श्री रामचंद्र साव के भतीजा और श्री चमरूसाव के ज्येष्ठ पुत्र श्री रामकृष्ण केशरवानी लखुर्री के सन् 1990 से 2000 तक सरपंच थे। उनके कार्यकाल में अनेक उल्लेखनीय कार्य हुए जिसे आज भी लोग याद करते हैं। सन् 1989 में गांव में अकाल पड़ा जिससे गांव में त्राहि त्राहि मच गई । उन्होंने यहां राहत कार्य कराया, तालाब खुदवाया जिसमें काम के बदले अनाज देने की व्यवस्था की जिससे लोगों को बड़ी राहत मिली। इसके साथ ही उन्होंने प्राथमिक और मीडिल स्कूल के जर्जर भवन का पुनर्निर्माण कराया। तब लखुर्री, लखाली, कोनियापाट, मौहाडीह, भदरा और अवरापाठ मिलाकर लखुर्री ग्राम पंचायत बना था। सभी ग्राम में राहत कार्य कराने से लोगों को बड़ी राहत मिली। उन्होंने बारीश नहीं होने से पंचायत के सभी आश्रित ग्रामों के लिए जमड़ी नाला में अस्थायी बांध का निर्माण कराया था जिससे खेतों की सिंचाई की गई। मौहाडीह, कोनियापाठ और अवराडीह में स्कूल स्वीकृत कराकर वहां स्कूल भवन का निर्माण कराया। मौहाडीह से लखुर्री तक एप्रोच रोड का भी निर्माण कराया जिससे आवागमन की सुविधा हो सकी। उनकी सदाचार, सत्यनिष्ठा और व्यवहार कुशलता की चर्चा तो अधिकारी लोग भी करते अघाते नहीं थे। ग्रामीणजन उनकी किसी बात को मानने से इंकार नहीं करते। 25 जून 1946 को जन्में श्री रामकृष्ण वर्तमान में अपने कनिष्ठ पुत्र विकेश कुमार के साथ जांजगीर में निवास करते हैं। उन्होंने ज्येष्ठ पुत्र होने के कारण अपने भाई बहनों का भी उतना ही ख्याल रखा जितना वे अपने पुत्र और पुत्रियों का किये।


इसके साथ ही उनकी धर्मपत्नी श्रीमती त्रिवेणी बाई भी लखुर्री ग्राम पंचायत की 1990 से 1995 तक सरपंच थी। इनके कार्यकाल में ग्राम में नल जल योजनान्तर्गत पाईप लाईन लगवाकर टंकी का निर्माण कराया।

डाॅ. संजय केशरवानी, लखुर्री

डॉक्टर संजय कुमार , सरपंच 

श्री रामकृष्ण केशरवानी के ज्येष्ठ पुत्र डाॅ. संजय केशरवानी बिलासपुर से अपनी पढ़ाई पूरी करके राजनीति शास्त्र में पी.एच-डी. की डिग्री लेने के बाद भी लखुर्री में अपने पिता जी के साथ कृषि कार्य में हाथ बंटाने लगे। उनके पिता जी और माता जी के ग्राम पंचायत में उल्लेखनीय कार्य को देखते हुए सन् 2005 से 2010 तक उन्हें लखुर्री ग्राम पंचायत के सरपंच की जिम्मेदारी मिली। उन्होंने बम्हनीडीह से लखुर्री तक सड़क पास कराकर शासन से सड़क निर्माण कराया। इस सड़क निर्माण में बम्हनीडीह के कुछ लोगों को जमीन के बदले जमीन माखन वंश द्वारा दी गई जिससे सड़क निर्माण कराया जा सका। लखुर्री में उपस्वास्थ केंद्र स्वीकृत कराकर उसका भवन निर्माण कराया जिससे ग्रामीणजनों को स्वास्थ लाभ के लिए दूर जाना नहीं पड़ता। बच्चों के खेलकूद के लिए खेल मैदान का निर्माण कराया। सभी तालाब में शासन की योजनान्तर्गत महिलाओं के नहाने के लिए निर्मला घाट का निर्माण कराया साथ ही पचरैहा पारा में शासकीय प्राथमिक स्कूल स्वीकृत कराकर स्कूल भवन निर्माण कराया। लखुर्री के सभी गलियों में सी. सी. रोड का निर्माण कराकर आवागमन को सुगम बनाया। आंगन बाड़ी भवन का भी निर्माण कराया जिससे छोटे नौनिहालों को स्कूल जाने का सौभाग्य मिला।


कमरीद और माखन साव परिवार

शिवरीनारायण के पास महानदी के किनारे कमरीद ग्राम का महाल नंबर एक माखन साव ने खरीदा था। उनके इस गांव से लगे गांव कोड़ाभाट से व्यापार शुरू करने का उल्लेख मिलता है। माखन साव के समय कमरीद के महाल नंबर दो की डिग्री नहीं हुई थी जो खेदूराम साव के समय हुई। इस गांव में 11550 वर्ग फुट में बना हवेली और धान रखने की कोठी बनी हुई थी। इस गांव में दोनों महाल करके लगभग 800 एकड़ कृति भूमि था। आपसी बंटवारा में टाटा परिवार, माखन साव के लंबरदार परिवार जिसमें आत्माराम साव, उमेदी साव और लक्ष्मण उर्फ खम्हारी साव परिवार को यहां 50-50 एकड़ कृषि भूमि दी गई थी। यहां की व्यवस्था बीजेराम कुंदनलाल फर्म से होता था। 06 वर्ष बाद बीजेराम की मृत्यु हो जाने से यहां की लंबरदारी हीरालाल कुंदनलाल के नाम से चलने लगी।

    

भगवान प्रसाद 

कमरीद ग्राम पंचायत के श्री समारूलाल साव सन् 1965 से 1970 तक सरपंच थे। उसके बाद उनके भतीजा श्री शिवभूषण केशरवानी सन् 1971 से 1976 तक सरपंच थे। आगे चलकर श्री पन्नालाल साव के ज्येष्ठ पुत्र श्री भगवान प्रसाद केशरवानी सन 1990 से 1995 तक सरपंच थे।


श्री हेमलाल केशरवानी, शिवरीनारायण

हेमलाल और उषा देवी 

श्री राघवप्रसाद साव के सबसे छोटे पुत्र श्री हेमलाल केशरवानी सन् 1976 से 1981 तक गगोरी ग्राम पंचायत के सरपंच थे। तब वे साजापाली में रहकर कृषि कार्य कर रहे थे और साजापाली गांव गगोरी ग्राम पंचायत के अंतर्गत था। 

    वास्तव में साजापाली और दौराभाठा गांव शिवरीनारायण खाते से खरीदा गया था और जिसके व्यवस्था की जिम्मेदारी पचकौड़ साव महादेव साव को सौंपी गई थी। वास्तव में साजापाली की जमीन रशाीद खां ने आत्माराम बलभद्र साव के पास रहन में रखा था जिसकी डिग्री 09.07.1923 में मिली। इसके बाद दौराभाठा की जमीन की डिग्री और दखल कब्जा सन् 1924 में मिला। इस गांव में कृषि कार्य की जिम्मेदारी श्री पचकौड़ साव महादेव साव को सौंपी गई थी। साजापाली में 6407 वर्ग फुट में बना एक घर था जिसमें रहने के लिए कमरे और धान की कोठी बनी हुई थी। दोनों भाई का परिवार शिवरीनारायण में रहते और ये वहां जाकर कृषि कार्य करते थे। लंबे समय तक दोनों भाईयों का परिवार समिलात में चलते रहे।



श्री रामस्वरूप केशरवानी, भिलाई

ई  रामस्वरूप 
श्री रामस्वरूप केशरवानी, टाटा परिवार के श्री मन्नाराम साव के ज्येष्ठ पुत्र हैं। उनका जन्म 05 दिसंबर 1947 को शिवरीनारायण में हुआ। वे शुरू से मेघावी थे और बिलासपुर से मेट्रिक की परीक्षा सन् 1961 में मेरिट दूसरे नंबर में आये थे और शिवरीनारायण आने पर परिवारजनों के द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया था। वे मेकेनिकल इंजीनरिंग की परीक्षा रूड़की से सन् 1965 में अच्छे अंकों से उत्तीर्ण करके भिलाई इस्पात संयंत्र में नौकरी करने लगे और वहीं से अक्टूबर 1999 में चीफ इंजीनियर (प्रोजेक्ट) पद से सेवानिवृत्त होकर नेहरूनगर भिलाई में रहते हैं। उनका एक मात्र पुत्र ई. अमित कुमार मर्चेन्ट नेवी में नौकरी करते हैं। सोमवार, दिनांक 31 जनवरी 2022 को रात्रि में भिलाई के सेक्टर 9 अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई। उनका दाह संस्कार 01 फरवरी 2022 को भिलाई में किया गया।



प्रो. बंशीलाल केशरवानी, बिलासपुर

प्रो बंशीलाल 

श्री बंशीलाल, साजापाली परिवार के श्री महादेव साव के पौत्र और श्री लक्ष्मीप्रसाद साव के कनिष्ठ पुत्र हैं। उनका जन्म 10 फरवरी 1938 को शिवरीनारायण में हुआ। संयुक्त परिवार में उनका लालन पालन हुआ। प्राथमिक और मीडिल स्कूल की शिक्षा शिवरीनारायण से, मेट्रिक की परीक्षा सन् 1956 में म्युनिसपल हाई स्कूल बिलासपुर, बी. एस-सी. की परीक्षा सन् 1960 में शासकीय विज्ञान महाविद्यालय रायपुर से करके एम. एस-सी. (प्राणीशास्त्र) की परीक्षा उन्होंने सागर विश्वविद्यालय से सन् 1962 में की। 02 अगस्त 1962 में उन्होंने सी. एम. डी. महाविद्यालय बिलासपुर में लेक्चरर के रूप में नौकरी की शुरूवात की और लगभग 35 वर्ष की सेवा करके प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष प्राणीशास्त्र के रूप में इस महाविद्यालय से 28 फरवरी 1998 को सेवा निवृत्त हुए। उन्होंने अपने सेवाकाल में महाविद्यालय में विभिन्न क्षेत्रों में कार्य किया। बचपन से लेकर आज तक श्री परमेश्वर केशरवानी और श्री मोतीलाल केशरवानी से उनकी अभिन्न मित्रता बनी रही। उन्होंने बताया कि बचपन में एक साथ रहते, पढ़ते और एक ही थाली में खाते भी थे। उनकी जीवन यात्रा में बड़े भाई श्री देवालाल और श्री भैरोलाल का भरपूर सहयोग मिलता रहा। उनके पुत्रगण ब्रजेश कुमार शिवरीनारायण, देवेन्द्र कुमार बिलासपुर और ई. यीतेन्द्र कुमार भिलाई में रहते हैं। उनका निरालानगर बिलासपुर में स्थायी निवास है।


श्री तुमागमप्रसाद केशरवानी, बिलासपुर

तुमागम प्रसाद 

माखन वंश अंतिम लंबरदार श्री तुमागमप्रसाद थे। उस समय लंबरदारी तुमागमप्रसाद सूरजदीव साव के नाम से चलती थे। क्वांर बदी 4, संवत् 1977 को ज्येष्ठ पुत्र के रूप में जन्में श्री तुमागम प्रसाद का बहुत ही लाड़ प्यार से लालन पालन हुआ। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से बी. काम की शिक्षा ग्रहण करके लखनऊ से एम. काम. की शिक्षा ग्रहण की। उनके पिता श्री श्याम मनोहर साव लंबरदार की जेठ शुक्ल 11, संवत् 2022 को मृत्यु हो जाने बाद उन्हें ये लंबरदारी मिली थी। उन्हें सारंगढ़ में कम्बाइंड ट्रांसपोर्ट जिसमें केशरवानी समाज के अन्यान्य लोगों का शेयर था, मैंनेजर बनाया गया था। लेकिन संयोग से ट्रांसपोर्ट कम्पनी घाटे में चली गई और बंद हो गई जिससे लोगों को बहुत घाटा हुआ। श्री तुमागमप्रसाद तब अपने साले के पास नागपुर चले गये लेकिन वहां वे नौकरी नहीं किये और बिलासपुर लौट आये। यहां वे स्कूल शिक्षा में नौकरी की और 28 फरवरी 1981 को प्राचार्य पद से सेवा निवृत्त होकर बिलासपुर में निवास करने लगे। उनके तीन लघु भ्राता श्री सत्यनारायण, श्री अम्बिका प्रसाद, श्री रामकृष्ण और दो बहलें राजो बाई तथा कारो बाई थे। 24 सितंबर 2012 की रात्रि में उनकी मृत्यु हो गई। उनका दाह संस्कार 25 सितंबर 2012 को सरकंडा मुक्तिधाम बिलासपुर में किया गया। मुखाग्नि उनके एक मात्र पुत्र ई. रविन्द्र प्रकाश केशरवानी ने दी। उन्हें हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, फारसी, मराठी और बंगाली भाषा का बहुत अच्छा ज्ञान था।

प्रो. शंकरलाल केशरवानी, बिलासपुर

प्रो शंकरलाल 

लखुर्री परिवार के लंबरदार श्री साधराम साव द्वितीय पुत्र प्रो. शंकरलाल केशरवानी शासकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय रायपुर से बी. ई. मेकेनिकल पास किये। आपने लाइट मेटल में डिप्लोमा भी किया। आप खड़कपुर से उच्च शिक्षा प्राप्त करके शासकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय रायपुर में सन् 1965 में लेक्चरर नियुक्त होकर अपने केरियर की शुरूवात की। शासकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय बिलासपुर से सन् 1995 में विभागाध्यक्ष मेकेनिकल डिपार्टमेंट पद से सेवानिवृत्त होकर बिलासपुर में स्वयं का उद्योग शंकर टूल्स प्राईवेट लिमिटेड स्थापित कर अपने परिवार को उद्योग जगत से जोड़ा। वे इस संस्थान के मैंनेजिंग डायरेक्टर हैं। वे नगर केसरवानी वैश्य कल्याण समिति बिलासपुर के अध्यक्ष रहे और अनेक स्थानों में सामाजिक धर्मशाला निर्माण में आर्थिक सहयोग किये हैं। 



रामेश्वर प्रसाद केशरवानी, बिलासपुर

रामेश्वर प्रसाद 
भादा परिवार के श्री मोहनलाल साव के ज्येष्ठ पुत्र के रूप में 01. 12. 1926 को उनका जन्म हुआ। उच्च शिक्षा बिलासपुर से पूरी करके वे स्कूली शिक्षा में शिक्षक हो गये। एक सफल शिक्षक के रूप में वे लंबे समय तक कोटा जिला बिलासपुर में पदस्थ रहे और 31. 01. 1996 को सेवानिवृत्त होकर बिलासपुर को अपना स्थायी निवास बनाकर रहने लगे। उनके दोनों सुपुत्र राजेन्द्र कुमार कुसमुंडा (कोरबा) में और राकेश कुमार कोआॅपरेटिव आॅडिटर के पद पर कार्यरत हैं।





गणेश प्रसाद केशरवानी, जांजगीर

गणेश प्रसाद 

भादा परिवार के स्व. जोहनलाल साव के कनिष्ठ पुत्र श्री गणेशप्रसाद बिलासपुर से उच्च शिक्षा प्राप्त करके बिलासपुर कोआॅपरेटिव बैंक में पदस्थ हुए। लंबे समय तक बिलासपुर में रहकर बाद में जांजगीर में स्थानान्तरित होकर यहीं रहने लगे और सेवानिवृत्त हुए। उनके ज्येष्ठ पुत्र अरूण कुमार बाल्को में अपनी सेवाएं देकर जांजगीर लौट आये और कनिष्ट पुत्र राकेश कुमार जिला कार्यालय जांजगीर में पदस्थ हैं। 05. 02. 2007 को जांजगीर में उनका निधन हो गया।




शोभाराम केशरवानी फ़ूड ऑफिसर

शोभाराम 
लखुर्री के लंबरदार स्व. साधराम साव के ज्येष्ठ पुत्र श्री शोभाराम का जन्म 01. 10. 1933 को हुआ। शिवरीनारायण, सारंगढ़ और बिलासपुर में उच्च शिक्षा प्राप्त करके वे फुड इंसपेक्टर के रूप में बस्तर में पदस्थ हुए। रायसेन और भोपाल में पदस्थ रहे और अंत में खाद्य अधिकारी पद से सेवा निवृत्त होकर चांपा को अपना स्थायी निवास बनाकर रहने लगे। उनकी श्री पराऊराम और श्री देवालाल से बहुत अच्छी मित्रता थी जिसे उन्होंने जीवन के अंतिम समय तक निभाते रहे। अंत में वे 13. 09. 2015 को स्वर्गवासी हो गये। उल्लेखनीय है कि उनकी तबियत शिवरीनारायण में बहुत बिगड़ गई और चिकित्सकों ने स्थान परिवर्तन करने की सलाह दी तब साधराम साव परिवार सहित लखुर्री में आ गये। तब से लखुर्री में धीरे धीरे सभी आकर रहने लगे।


मोतीलाल केशरवानी, रजिस्ट्रार

मोतीलाल 
हसुवा परिवार के स्व. गिरीचंद्र साव के ज्येष्ठ और स्व. मुरीतराम साव के ज्येष्ठ सुपुत्र श्री मोतीलाल बिलासपुर और रायपुर में शिक्षा पूरी करके सहायक पंजीयक के रूप में अपनी सेवाएं शुरू की। अपने सेवाकार में वे लंबे समय तक बेमेतरा में पदस्थ रहे। बाद में मुंगेली, भाठापारा और रायपुर में रजिस्ट्रार पद पर कार्य करते हुए सेवा निवृत्त हुए और रायपुर को अपना स्थायी निवास बनाया। प्रो. बंशीलाल, परमेश्वर प्रसाद से उनकी बहुत अच्छी मित्रता थी जो अंत तक बनी रही। अंत में 29. 01. 2006 को उनका निधन हो गया।




कृष्णलाल

कृष्ण लाल 
हसुवा के महिधर (चंदनहा) साव के ज्येष्ठ पुत्र श्री कृष्णलाल का जन्म 01. 07. 1930 को हुआ। वे उच्च शिक्षा पूरी करके स्कूल शिक्षा में पदस्थ हो गये। कटगी स्कूल में वे लंबे समय तब पदस्थ रहे। सेवा निवृत्ति होकर हसुवा में रहने लगे। बाद में अस्वस्थ हुए तब शिवरीनारायण में रहकर स्वास्थ्य लाभ लेने लगे और अंत में स्वर्गवासी हुए।






अर्जुनलाल

अर्जुन लाल 

हसुवा के महिधर (चंदनहा) साव के पुत्र अर्जुनलाल का जन्म 01. 07. 1940 को हुआ। अपनी शिक्षा पूरी करके वे कुषि विभाग में नौकरी करने लगे। वे बलौदाबाजार में लेबे समय तक पदस्थ रहे और कृषि विस्तार अधिकारी के रूप में सेवा निवृत्त होकर हसुवा आ गये। आगे चलकर उनके दोनों पुत्र प्रमिल कुमार और सुनील कुमार शिवरीनारायण में व्यवसाय करने लगे त बवे भी यहां रहने लगे और अंत में 10. 07. 2020 को स्वर्गवासी हुए। 


शिवदत्त केशरवानी, रायपुर

शिवदत्त 
टाटा परिवार के स्व. इच्छाराम साव के ज्येष्ठ पुत्र श्री शिवदत्त का जन्म 04. 03. 1943 को हुआ। बिलासपुर में अपनी शिक्षा पूरी करके वे लोक स्वास्थ यांत्रिकी विभाग में सब इंजीनियर के रूप में पदस्थ हो गये। वे अपने सेवाकाल में महासमुंद, रायपुर, कोंडागांव, जगदलपुर, अम्बिकापुर और पुनः रायपुर में पदस्थ रहे और मार्च 2004 में अनुविभागीय अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त होकर रायपुर में स्थायी रूप से रहने लगे। उनका एकमात्र सुपुत्र डाॅ. शैलेन्द्र कुमार कान, नाक और गला के सर्जन हैं जबकि पोती डाॅ. मुस्कान मेडिकल शिक्षा प्राप्त कर रही है।  



श्री धीरेन्द्र केशरवानी, बिलासपुर

धीरेन्द्र कुमार 
श्री कौशल प्रसाद केशरवानी के कनिष्ठ पुत्र और माखन वंश के हसुवा परिवार के लंबरदार श्री गिरीचंद साव के पौत्र श्री धीरेन्द्र केशरवानी भारतीय जनता पार्टी से जुड़कर अनेक प्रकोष्ट में पदाधिकारी रहे। 10 जंलाई 1966 में जन्में श्री धीरेन्द्र नगर केसरवानी वैश्य कल्याण समिति बिलासपुर के सचिव और अध्यक्ष रहे। वे छत्तीसगढ़ राज्य केसरवानी वैश्य सभा के संगठन मंत्री और अखिल भारतीय केसरवानी वैश्य महासभा में राष्ट्रीय संगठन मंत्री थे। वे विभन्न संगठनों से जुड़कर कार्य कर पुरस्कृत और सम्मानित हुए हैं।




श्री आशीष केशरवानी, शिवरीनारायण 

आशीष और शोभा देवी 

माखन वंश के सफल लंबरदार श्री सूरजदीन साव के ज्येष्ठ पौत्र और श्री पराऊराम केशरवानी के पुत्र श्री आशीष केशरवानी बी. एस-सी. की शिक्षा ग्रहण करके अपने पैत्रिक व्यवसाय को चुना और शिवरीनारायण में आशीष इंटरप्राइजेस के रूप में मेडिल स्टोर का संचालन कर रहे हैं। शिवरीनारायण में केशरवानी भवन के निर्माण, व्यवस्था के साथ नगर केसरवानी वैश्य कल्याण समिति के सचिव रहे। वे अखिल भारतीय केसरवानी वैश्य महासभा के छत्तीसगढ़ ईकाई के कार्यकारिणी सदस्य थे। 


श्री रविन्द्र केशरवानी, बिलासपुर

रविंद्र कुमार 
हसुवा के सफल सरपंच श्री गोरेलाल के ज्येष्ठ पुत्र श्री रविन्द्र केशरवानी का जन्म 31 अक्टूबर 1960 को हुआ। अपनी शिक्षा पूरी करके छत्तीसगढ़ विद्याुत मंडल में कार्यरत हैं। वे कर्मचारी संगठन के अनेक पदों पर कार्य करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य केसरवानी वैश्य सभा के प्रदेश संगठन मंत्री और वरिष्ठ उपाध्यक्ष थे और समाज को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज भी वे अनेक संगठनों से जुड़कर कार्य कर रहे हैं और विभन्न संगठनों से पुरस्कृत और सम्मानित हुए हैं।





ई. रविन्द्रप्रकाश केशरवानी, बिलासपुर

ई रविंद्र प्रकाश, आर्किटेक्ट  

माखन वंश के अंतिम लंबरदार श्री तुमागमप्रसाद केशरवानी के एक मात्र पुत्र रविन्द्र केशरवानी भोपाल से इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त करके पहले गेमन इंडिया कंपनी में कार्य किये। पढ़ाई में वे मेघावी तो थे ही कर्त्तव्यपरायण भी हैं। वे अपने माता पिता की आज्ञा पालन करके नौकरी छोड़कर बिलासपुर लौट आये और स्वयं का व्यवसाय करने लगें। वे नगर केशरवानी वैश्य कल्याण समिति बिलासपुर के विभिन्न पदों पर रहे साथ ही अखिल भारतीय केसरवानी वैश्य महासभा के शिक्षा प्रकोष्ट के राष्ट्रीय संयोजक थे।





ई. प्रांजल केशरवानी, यू. एस. ए.

प्रांजल और रूचि
 श्री राघवप्रसाद साव के ज्येष्ठ प्रपौत्र, श्री देवालाल जी के पौत्र और प्रो. अश्विनी कल्याणी केशरवानी के ज्येष्ठ पुत्र ई. प्रांजल केशरवानी का जन्म 09 दिसंबर 1984 को रायगढ़ के आसर्फी देवी चिकित्सालय में हुआ। धीर, गंभीर और बचपन से मेघावी प्रांजल कुमार लायंस इंग्लिश हायर सेकंड्री स्कूल चांपा से 2002 में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कर पी. ई. टी. परीक्षा पास करके श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूटऑफ  टेक्नालाॅजी भिलाई से 2006 में बी. ई. कम्प्यूटर सांइस में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कर परिवार को गौरवान्वित किया। मार्च 2007 में उन्हें टी. सी. एस. कंपनी मुंबई में नौकरी मिली और दो वर्ष के भीतर अप्रेल 2009 में इस कंपनी ने उन्हें यू. एस. ए. की शाखा में ट्रांसफर कर भेज दिया। लगभग 13 वर्षों की कड़ी मेहनत से आज वह अमरीका के ऑप्टम कंपनी में प्रिंसीपल इंजीनियर के पद पर कार्यरत है। उनकी धर्मपत्नी ई. रूचि केशरवानी और दोनों सुपुत्र मास्टर एकाक्ष और अक्षज प्रांजल केशरवानी के साथ वहां टेक्सास की राजधानी ऑस्टिन में स्थयी निवास कर रहे हैं।


ई. अमित केशरवानी, शिवरीनारायण

अमित केशरवानी 

श्री राघवप्रसाद साव के सबसे छोटे पुत्र श्री हेमलाल केशरवानी के कनिष्ठ पुत्र अमित कुमार भिलाई से मेकेनिकल इंजीनियरिंग में बी. ई. करके अपने पिता जी के व्यवसाय में हाथ बंटा रहे हैं और व्यवसाय को ऊंचाई तक ले जाने में कोई कसर नहीं छोड़े हैं।






गौटियाराम केशरवानी, अधिवक्ता

गौटियाराम ,अधिवक्ता 
माखन वंश के वंशज और स्व. श्यामलाल साव के कनिष्ट पुत्र श्री गौटियाराम केशरवानी जांजगीर चांपा जिले के वरिष्ठतम और सफल अधिवक्ता थे। उन्हें कानून सम्बंधी रूचि उनके पिता श्री श्यामलाल साव से विरासत में मिली थी। वे उच्च शिक्षा के लिए इलाहाबाद गये थे। कानून की पढ़ाई नागपुर से पूरी करके उन्हें जांजगीर तहसील मुख्यालय को अपना कार्यक्षेत्र बनाकर स्थायी रूप से रहने लगे। उनकी व्यवहार कुशलता और कानूनी तर्क से जज भी लोहा मानते थे। 20. 08. 1928 को जन्में गौटियाराम सन् 1954 में पुराना चंदनियापारा में अपना घर बनवाकर स्थयी रूप से रहने लगे। उनका पूरा परिवार कानूनविद् हैं। सुपुत्र श्री अजय केशरवानी जांजगीर में, पौत्र साकेत कुमार बिलासपुर हाई कोर्ट और जांजगीर में, पुत्र क्रांति कुमार पामगढ़ में और पौत्र अतुल कुमार बिलासपुर हाई कोर्ट में सफलता पूर्वक प्रेक्टिस कर रहे हैं। उनके ज्येष्ठ पौत्र डाॅ. आदित्य और पुत्र वधुएं डाॅ. सोनम और डाॅ. परिजात बिलासपुर में अपनी सेवाएं दे रही हैं। 94 वर्ष की आयु में भरापूरा परिवार छोड़कर वे 09. 01. 2022 को स्वार्गारोहण किये। 

महेश प्रसाद अधिवक्ता 

महेश प्रसाद 
भादा परिवार के स्व. झड़ी साव के सुपुत्र महेश प्रसाद केशरवानी एक सफल अधिवक्ता हैं और जांजगीर में प्रेक्टिस कर रहे हैं। वे भारतीय स्टेट बैंक के अलावा अनेक राष्ट्रीकृत बैंकों के कानूनी सलाहकार भी हैं। उनके एकमात्र सुपुत्र रजत कुमार पर्यावरण विभाग रायपुर में कार्यरत हैं।




श्रीमती सविता महेश केशरवानी

सविता देवी ,अधिवक्ता 
भादा परिवार के स्व. झड़ी साव की पुत्रवधु, महेश प्रसाद की धर्मपत्नी श्रीमती सविता केशरवानी एक सफल महिला अधिवक्ता हैं। वे न केवल माखन वंश की बल्कि जांजगीर क्षेत्र की प्रथम महिला अधिवक्ता हैं। मुंगेली के स्व. ओंकार प्रसाद केशरवानी की पुत्री हैं। राजनीति उन्हें विरासत में मिली है और वे एक भाजपा की सक्रिय कार्यकत्र्ता हैं।





श्री चंद्रकुमार केशरवानी अधिवक्ता

चंद्रकुमार ,अधिवक्ता 
श्री चंद्रकुमार, सुप्रसिद्ध अधिवक्ता श्री जगदीश प्रसाद केशरवानी के पुत्र और श्री श्यामलाल साव के पौत्र हैं। माखन वंश में श्री श्यामलाल साव को कानून की अच्छी जानकारी थी। कदाचित् इसी कारण उन्होंने दोनों पुत्र श्री जगदीश प्रसाद और श्री गौंटियाराम को कानून की अच्छी शिक्षा दिलायी। दोनों ने क्रमशः बिलासपुर और जांजगीर में अधिवक्ता के रूप में खूब यश अर्जित किया। चंद्रकुमार जी भी छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बार एसोसियेशन के विभिन्न पदों पर  कार्य करते हुए लगातार तीन बार अध्यक्ष रहें। 



श्री अजय कुमार केशरवानी अधिवक्ता

अजय और कल्पना 
श्री अजय कुमार, जांजगीर के सुप्रसिद्ध अधिवक्ता श्री गौंटियाराम केशरवानी के ज्येष्ठ सुपुत्र और श्री श्यामलाल साव के पौत्र हैं। उनका जन्म 08 अगस्त 1955 में जांजगीर में हुआ। उनकी पूरी शिक्षा जांजगीर में हुई। लाॅ कालेज जांजगीर के वे छात्रसंघ अध्यक्ष रहे। वे मृदुभाषी और व्यवहार कुशल हैं। उन्हें कानून सम्बंधी जानकारी विरासत में मिला है। वे जिला अधिवक्ता संघ जांजगीर के लगातार तीन बार अध्यक्ष रहे। बैडमिंटन खेल में उनकी गहरी रूचि है। इस खेल में उन्होंने अनेक पुरस्कार प्राप्त किया है। उनके ज्येष्ठ पुत्र आदित्य केशरवानी कुशल न्यूरो सर्जन है जबकि कनिष्ठ पुत्र साकेत केशरवानी अधिवक्ता हैं।




डाॅ. आदित्य केशरवानी सुप्रसिद्ध न्यूरो सर्जन

डॉक्टर आदित्य और डॉक्टर सोनम 

30 जून 1983 को जन्में आदित्य कुमार सुप्रसिद्ध कानूनविद् श्री गौटियाराम केशरवानी के पौत्र और अधिवक्ता अजय कल्पना केशरवानी के पुत्र हैं। उन्होंने अपने पैत्रिक कानून की शिक्षा से हटकर चिकित्सा सम्बंधी अध्ययन  और पेशा को अपनाया। वे सिम्स बिलासपुर (शासकीय छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट आाॅफ मेडिकल सांइस बिलासपुर) के प्रथम बैच 2007 के मेघावी छात्र थे। उन्होंने एम. एस. की शिक्षा कस्तूरबा मेडिकल कालेज मैंगलोर से 2012 में तथा न्यूरो सर्जरी में एम. सी. एच. कोलकाता से 2016 में करके बिलासपुर में सफल प्रैक्टिस कर रहे हैं। उनकी धर्म पत्नी डाॅ. सोनम केशरवानी भीऑप्थेल्मोलॉजिस्ट  (आंख के डाॅक्टर) हैं और डाॅ. आदित्य के साथ बिलासपुर में प्रेक्टिस करते हुए निवास कर रहे हैं।



क्रांति कुमार केशरवानी अधिवक्ता

क्रांति कुमार ,अधिवक्ता 
15 अगस्त 1957 को जन्में क्रांति कुमार, सुप्रसिद्ध अधिवक्ता श्री गौंटियाराम केशरवानी के द्वितीय सुपुत्र हैं। उनकी शिक्षा दीक्षा जांजगीर में हुई और वे सिविल कोर्ट पामगढ़ में प्रैक्टिस करते हुए पामगढ़ में ही निवास कर रहे हैं।





श्री अतुल केशरवानी अधिवक्ता

अतुल कुमार ,अधिवक्ता 
अधिवक्ता श्री क्रांतिकुमार के पुत्र अतुल कुमार जांजगीर के सुप्रसिद्ध अधिवक्ता श्री गौटियाराम केशरवानी के पौत्र हैं। उन्होंने बी.ए., एल.एल.बी. और एल.एल.एम. की शिक्षा सिमबायसिस पुणे से प्राप्त करके छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बिलासपुर में सफल अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस कर रहे हैं। उनकी धर्म पत्नी डाॅ. परिजात केशरवानी एम. डी. आयुर्वेद हैं और बिलासपुर में प्रेक्टिस करते हुए निवास कर रहे हैं।



साकेत केशरवानी, अधिवक्ता ,  जांजगीर

साकेत केशरवानी, अधिवक्ता
श्री साकेत केशरवानी, जांजगीर के प्रसिद्ध अधिवक्ता और खेल प्रेमी श्री अजय केशरवानी के कनिष्ठ सुपुत्र और अधिवक्ता श्री गौंटियाराम जी के पौत्र हैं। उन्होंने पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर से एल.एल.बी. की शिक्षा प्राप्त काके सिम्बायसिस पुणे से एल.एल.एम. की शिक्षा प्रापत करके जांजगीर और हाई कोर्ट बिलासपुर में प्रेक्टिस कर अपने विरासत में मिले पेशा को अपनाये हुए हैं। 





श्री राजेश कुमार केशरवानी अधिवक्ता

राजेश कुमार ,संगीता देवी, हर्षिता , श्रीजिता 
श्री राजेश कुमार, हसुवा के सफल सरपंच श्री गोरेलाल केशरवानी के सुपुत्र हैं। वे छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में सफल प्रैक्टिस करते हुए बिलासपुर में निवास करते हैं। उनकी धर्मपत्नी संगीता देवी सामाजिक कार्य करते हुए नगर केशरवानी वैश्य महिला सभा बिलासपुर की अध्यक्ष हैं।  उनकी सुपुत्री कु हर्षिता सी ए की परीक्षा पास करके मुंबई में नौकरी कर रही है। 





अशोक केशरवानी, बिलासपुर

अशोक कुमार और मनीषा देवी 
लखुर्री परिवार के लंबरदार श्री साधराम साव के पौत्र और प्रो. शंकरलाल केशरवानी के ज्येष्ठ पुत्र श्री अशोक केशरवानी नगर केसरवानी वैश्य कल्याण समिति बिलासपुर के 2005 से 2008 कार्यकारिणीके अध्यक्ष और अखिल भारतीय केसरवानी वैश्य महासभा की कार्यकारिणी में राष्ट्रीय मंत्री थे। वर्तमान में वे भारतीय व्यापार मंडल की छत्तीसगढ़ ईकाई के अध्यक्ष और विभिन्न उद्योग समूह से जुड़े हैं। छत्तीसगढ़ केशरवानी वैश्य सभा की छटवीं कार्यकारिणी की  प्रदेश अध्यक्ष  हैं। 


श्रीमती मनीषा अशोक केशरवानी, बिलासपुर

मनीषा अशोक 

लखुर्री परिवार के लंबरदार श्री साधराम साव के पौत्र वधु, प्रो. शंकरलाल की पुत्र वधु और अशोक केशरवानी बिलासपुर की धर्मपत्नी श्रीमती मनीषा केशरवानी अखिल भारतीय केसरवानी वैश्य महिला महासभा की प्रथम कार्यकारणी में उपाध्यक्ष, नगर केसरवानी वैश्य महिला कल्याण समिति बिलासपुर की अध्यक्ष और छत्तीसगढ़ केसरवानी वैश्य महिला सभा की तृतीय कार्यकारिणी की प्रदेश अध्यक्ष थी। वर्तमान में वे शंकर टूल्स प्राइवेट लिमिटेड बिलासपुर की डायरेक्टर हैं।


श्रीमती कविता डाॅ. शैलेन्द्र केशरवानी, रायपुर

डॉक्टर शैलेन्द्र और कविता देवी 

टाटा परिवार के श्री इच्छाराम साव की पौत्र वधु, श्री शिवदत्त केशरवानी की पुत्र वधु और डाॅ. शैलेन्द्र केशरवानी की धर्मपत्नी श्रीमती कविता केशरवानी नगर केशरवानी वैश्य महिला सभा रायपुर की लगातार तीन बार अध्यक्ष, अखिल भारतीय केसरवानी वैश्य महिला सभा की द्वितीय कार्यकारिणी में मंत्री और छत्तीसगढ़ राज्य केसरवानी वैश्य महिला सभा की चतुर्थ कार्यकारिणी की प्रदेश अध्यक्ष और वर्तमान में संरक्षक हैं। उनके पुत्र ई. पलाश और डाॅ. मुस्कान एम. बी. बी. एस. की पढ़ाई कर रही है।



श्रीमती कल्पना अजय केशरवानी, जांजगीर

गौंटियाराम ,अजय कुमार और कल्पना 
जांजगीर के सुप्रसिद्ध अधिवक्ता श्री गौटियाराम की पुत्र वधु और अधिवक्ता श्री अजय केशरवानी की धर्मपत्नी श्रीमती कल्पना केशरवानी छत्तीसगढ़ राज्य केसरवानी वैश्य महिला सभा की द्वितीय कार्यकारिणी में प्रदेश महामंत्री थी। उन्होंने अपने महामंत्रित्व काल में चांपा में श्रीमती कल्याणी केशरवानी राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय केसरवानी वैश्य महिला महासभा की कार्यकारिणी की ऐतिहासिक बैठक की संयोजक थी। इस बैठक में देश के विभिन्न क्षेत्रों और छत्तीसगढ़ के कोने कोने से महिलाएं सम्मिलित हुई थीं। इसके अलावा वे छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा दहेज प्रतिषेध सलाहकार समिति में तीन वर्ष के लिए सदस्य, बालक कल्याण समिति में तीन वर्ष के लिए सदस्य, जिला क्राइसेस मैनेजमेंट सम्तिि में तीन वर्ष के लिए सदस्य, किशोर न्याय बोर्ड जांजगीर में तीन वर्ष के लिए सदस्य, लायनेस क्लब जांजगीर नैला में तीन बार अध्यक्ष, बैरिस्टर छेदीलाल शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के जनभागीदारी समिति के सदस्य, शासकीय गट्टानी कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला जांजगीर के जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष और शासकीय कृषि महाविद्यालय जांजगीर में आंतरिक शिकायत समिति की सदस्य मनोनित हुई थी।

श्रीमती मनोरमा ब्रजेश केशरवानी, शिवरीनारायण

मनोरमा देवी 

प्रो. बंशीलाल की पुत्र वधु और श्री ब्रजेश केशरवानी की धर्मपत्नी श्रीमती मनोरमा केशरवानी सन १९९६ से २००० तक पार्षद और २००४ से २००९ तक नगर पंचायत शिवरीनारायण की अध्यक्ष थी।





श्रीमती नीता धीरेन्द्र केशरवानी, बिलासपुर

नीता धीरेन्द्र 

हसुवा परिवार के श्री कौशल प्रसाद केशरवानी की पुत्र वधु और श्री धीरेन्द्र केशरवानी की धर्मपत्नी श्रीमती नीता केशरवानी नगर केसरवानी वैश्य महिला कल्याण समिति बिलासपुर की अध्यक्ष और अखिल भारतीय केसरवानी वैश्य महिला महासभा की कार्यकारिणी सदस्य हैं।










बृजेश कुमार 

बृजेश कुमार 
    प्रो बंशीलाल और तारा देवी के द्वितीय सुपुत्र और स्मृतिशेष लक्ष्मीप्रसाद के पौत्र बृजेश कुमार कमल प्रिंटिंग प्रेस का संचालन करते हुए नगर पंचायत शिवरीनारायण के पार्षद और मठ मंदिर न्यास शिवरीनारायण के सदस्य हैं। 







देवेंद्र कुमार

देवेंद्र कुमार 
     प्रो बंशीलाल और तारा देवी के तृतीय  सुपुत्र और स्मृतिशेष लक्ष्मीप्रसाद के पौत्र देवेंद्र कुमार नायब तहसील ,तहसीलदार ,उप जिलाधीश के साथ आर टी ओ बिलासपुर के रूप में कार्य करते हुए बहुत लोकप्रिय हुए। धीर ,गंभीर स्वाभाव और पारिवारिक जीवन से मुक्त रहते हुए अनेक तीर्थ यात्रा कर संयुक्त कलेक्टर पद में पदोन्नत होकर शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त होकर बिलासपुर में रहकर माता पिता की सेवा कर रहे हैं। 





ई यतेंद्र कुमार

यतेंद्र कुमार
प्रो बंशीलाल और तारा देवी के सबसे छोटे  सुपुत्र और स्मृतिशेष लक्ष्मीप्रसाद के पौत्र ई यतेंद्र कुमार भिलाई स्टील प्लांट में इंजीनियर हैं।









ई अविचल कुमार

ई अविचल कुमार 
 
लखुर्री के लम्बरदार रामचंद्र साव के पुत्र रामदयाल साव के पौत्र और मनका मार्बल चांपा के संचालक श्री संतोष कुमार के छोटे सुपुत्र अविचल कुमार वर्तमान में बेंगलुरु में साफ्टवेयर कंपनी में इंजीनियर है।
शुरू से मेघावी अविचल की प्रारंभिक शिक्षा चांपा और बिलासपुर में हुई। इंजीनियरिंग की शिक्षा भिलाई के पास करके पुणे के एक साफ्वेयर कंपनी में पदस्थ हुए बाद में दूसरी कंपनी में बेंगलुरु आ गए।  उनका चयन अमेरिका की साफ्टवेयर कंपनी में हो गया है। वर्तमान में वे अमेरिका के अटलान्टा में पदस्थ हैं। 





ई धीरेन्द्र कुमार

ई धीरेन्द्र कुमार 
    टाटा परिवार के श्री मन्नाराम नंदकुमार के पौत्र और रामकुमार के सुपुत्र धीरेन्द्र कुमार भिलाई से इंजीनियरिंग पास करके पहले पुणे में एक साफ्टवेयर कंपनी में कार्य करते हुए उनका चयन अमेरिका के टेक्सॉस स्टेट के ह्यूस्टन में हो गया और वे वहां सर्विस कर रहे हैं। 

प्रो अश्विनी कुमार केशरवानी 
    
प्रो अश्विनी केशरवानी 

गोविन्द साव के वंशज और राघव साव के पौत्र अश्विनी कुमार ४० वर्षो तक उच्च शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएँ देते हुए वर्तमान में शासकीय मिनीमाता कन्या महाविद्यालय कोरबा में पदस्थ हैं।  लेखन वृत्ति से जुड़े अश्विनी कुमार छत्तीसगढ़ प्रदेश के राष्ट्रीय लेखकों में से एक हैं. सामाजिक कार्यो में हमेशा सक्रीय रहते हुए छत्तीसगढ़ राज्य केशरवानी वैश्य सभा के द्वितीय प्रदेश अध्यक्ष थे और अखिल भारतीय केशरवानी वैश्य महासभा की राष्ट्रिय कार्यकारिणी में विभिन्न पदों पर रहते हुए अभी राष्ट्रिय उपाध्यक्ष हैं। अनेक समाजिक और साहित्यिक संस्थाओं के सम्मानित हो चुके हैं।  उनकी अब तक सात पुस्तकें प्रकाशित हो चुकें हैं। 
श्रीमती कल्याणी केशरवानी 
     
श्रीमती कल्याणी केशरवानी 

स्मृतिशेष देवलाल केशरवानी की पुत्रवधु और प्रो अश्विनी केशरवानी की जीवन संगिनी श्रीमती कल्याणी केशरवानी घर परिवार के दायित्यों को सफलता पूर्वक निभाते हुए सामाजिक दायित्व का निर्वहन करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य केसरवानी महिला सभा की कोषाध्यक्ष , नगर महिला सभा की प्रथम अध्यक्ष रहकर अखिल भारतीय केसरवानी महिला महासभा की द्वितीय कार्यकारिणी में राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में देश की महिलाओं को एकजूट करते हुए तृतीय कार्यकारिणी में राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में सफलतापूर्वक कार्य करते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश को गौरवान्वित किया है।  छत्तीसगढ़ प्रदेश में ही नहीं बल्कि पुरे देश में महिलाएं समाज में बहुत सक्रिय हैं , उनकी इस सक्रियता में उनका बहुत बड़ा योगदान है।  वर्तमान में वे राष्ट्रीय महिला महासभा की राष्ट्रीय संरक्षक हैं। इसके साथ ही राष्ट्रीय केसरवानी वेलफेयर ट्रस्ट की महिला इकाई की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।  यह संस्था पूरे देश के प्रतिभावान सामाजिक युवक युवतियों को उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए पैसा उपलब्ध कराती है। इसके अलावा वे इंटरनेशनल लायनेस क्लब से जुड़कर सेवाकार्य कर रही हैं।  लायनेस क्लब चाम्पा की तीन बार अध्यक्ष रहीं, लायनेस केबिनेट की सेक्रेटरी और चेयर पर्सन रहकर सेवाकार्य में संलग्न हैं। वे सामाजिक और पारिवारिक परिवेश की घटनाओं पर चिंतन मनन करके लेख के रूप क्षेत्रीय , प्रादेशिक और राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। सबका एक पुस्तकाकार संकलन "घर परिवार" प्रकाशित हो चूका है। 


विविध

  • लखुर्री के शिव मंदिर के भोग राग के लिए पांच एकड़ कृषि भूमि निकाली गई थी।
  • हसुवा के शिव मंदिर के भोग राग के लिए पांच एकड़ कृषि भूमि निकाली गई थी।
  • झुमका के हनुमान मंदिर के भोग राग के लिए तीन एकड़ कृषि भूमि निकाली गई थी।
  • शिवरीनारायण के महेश्वरनाथ मंदिर के भोग राग के लिए बिलाईगढ़ कटगी के जमींदार प्रानसिंह ने नवापारा गांव के 16 आना कृषि भूमि दान की थी जिसकी आमदनी से मंदिर की व्यवस्था और भोग राग लगता था।
  • हसुवा के पांच एकड़ कृषि भूमि कृपाराम साव की बेटी रूखमीन बाई की शादी में दी गई थी।
  • अमोदी के तीन एकड़ कृषि भूमि परघिया साव शिवरीनारायण को पराऊराम की शादी के लिए दी गई थी।
  • नवागढ़ में श्री आत्माराम साव अपने दामाद बिहारी साव व मुड़िया साव को विवाह में दिये थे लेकिन पहले जमीन को बेंच देने के कारण दूरी बाद की को आत्माराम साव अपने ही नाम रखे थे। इस जमीन पर उनके वंशज झुनीराम व जेठुराम काबिज हैं।
  • दिनांक 08 दिसंबर 1948 को झड़ीराम साव, मदनलाल और रूनु साव चार नौकर के साथ बेलादूला के घर में जबरदस्ती घुसकर उत्पात मचाने लगा। जबकि बेलादुला लखुर्री के दुकान से खरीदा गया था और 40-45 साल से उनकी देखरेख में गांव है।
  • दिनांक 01 जनवरी 1949 को झड़ीराम साव और मदनलाल बेलादूला के घर में जबरदस्ती घुसकर ढाबा को फोड़कर पहले 700 बोरा और बाद में 225 बोरा धान बाराद्वार के राईस मिल में बेंच दिया।
  • माखन वंश के सभी मालगुजारी गांवों में तालाब खुदवाया गया था जिससे कृषि भूमि की सिंचाई और निस्तार होता था।
  • श्री आत्माराम साव के द्वारा सन् 1935 में शिवरीनारायण में अपने दादा श्री माखन साव की स्मृति में भवन निर्माण कराया था जिसमें आज शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लगता है।
  • शिवरीनारायण में साव घाट जमीन के कटाव रोकने और स्नान ध्यान आदि के लिए और यहां के सभी कुंआ माखन वंश के द्वारा बनवाया गया था।
  • ब्रिटिश सरकार द्वारा अकाल पड़ने पर माखन वंश के द्वारा अपने मालगुजारी गांवों क्रमशः हसुवा, टाटा और लखुर्री में तालाब खुदवाये जाने पर श्री खेदूराम साव मालगुजार और लंबरदार को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया था।
  • माखन वंश में शिवरीनारायण तहसील के आनरेरी बेंच मजिस्ट्रेट के रूप में श्री माखन साव और उसके बाद श्री खेदूराम साव की नियुक्ति की गई थी।
  • जब तहसील मुख्यालय शिवरीनारायण से जांजगीर स्थानान्तरित कर दिया गया तब माखन वंश के मालगुजार और लंबरदार श्री आत्माराम साव को शिवरीनारायण बेंच के आनरेरी बेंच मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था।
  • छत्तीसगढ़ के राजा महाराजा और ब्रिटिश सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों में माखन वंश के मालगुजार व लंबरदार श्री माखन साव, श्री खेदूराम साव और श्री आत्माराम साव को ससम्मान आमंत्रित किया जाता रहा है। 


माखन वंश के 84 गांव के व्यवस्था के लिए 28 गांवों में हवेली, मकान और कोठी निम्नानुसार बने थे

  1. शिवरीनारायण में हवेली का नापः-
    • पुरानी हवेली - 8826 वर्ग फुट
    • नया घर - 4280 वर्ग फुट
    • लक्षमण बाड़ा - 950 वर्ग फुट
    • सीताराम बाड़ा - 3846 वर्ग फुट
    • बांस बाड़ा - 1450 वर्ग फुट
    • फुलवारी में कोआपरेटिव बैंक - 4380 वर्ग फुट
    • फुलवारी की जमीन - 01 एकड़ 50 डिस्मिल
    • (फुलवारी की जमीन वास्तव में शर्त हार जाने के कारण भोगहा जी ने दिया था।)
  2. कमरीद की हवेली एवं कोठी - 11550 वर्ग फुट
  3. बेल्हा का मकान एवं कोठी - 2350 वर्ग फुट
  4. भादा का घर एवं ढाबा - 7610 वर्ग फुट
  5. सिल्ली का घर एवं ढाबा - 6630 वर्ग फुट
  6. जांजगीर का घर - 2050 वर्ग फुट
  7. बिलासपुर का घर - 2268 वर्ग फुट
  8. खपरीडीह का मकान और कोठी - 19584 वर्ग फुट
  9. साजापाली का घर एवं कोठी - 6407 वर्ग फुट
  10. पुरगांव का घर एवं कोठी - 8240 वर्ग फुट
  11. झुमका की हवेली एवं कोठी - 16170 वर्ग फुट
  12. टाटा की मकान एवं कोठी - 14500 वर्ग फुट
  13. मुक्ता का घर एवं कोठी - 1384 वर्ग फुट
  14. बम्हनीडीह का घर - 1560 वर्ग फुट
  15. बेलादूला की हवेली एवं कोठी  - 11700 वर्ग फुट
  16. लखुर्री की हवेली - 30136 वर्ग फुट
    • कोठा - 4046 वर्ग फुट
    • मकान टीनपेाश और बाड़ी - 1372 वर्ग फुट
    • पैरा रखने का पक्का मकान - 45900 वर्ग फुट
    • पक्का मकान धान की कोठी - 2100 वर्ग फुट
    • कुल क्षेत्रफल - 83554 वर्ग फुट
  17. मौहाडीह का मकान एवं कोठी - 8254 वर्ग फुट
  18. तुस्मा की कोठी - 400 वर्ग फुट
  19. मुड़पार की कोठी - 150 वर्ग फुट
  20. डोंगा कोहरौद की कोठी - 680 वर्ग फुट
  21. गोधना का घर एवं कोठी - 2271 वर्ग फुट
  22. कांसा की कोठी - 8480 वर्ग फुट
  23. बरगांव का घर एवं कोठी - 4050 वर्ग फुट
  24. चांपा का घर - 2100 वर्ग फुट
  25. पंडरीपाली का घर एवं कोठी - 3216 वर्ग फुट
  26. भुसड़ा की कोठी - 726 वर्ग फुट
  27. हसुवा की प्रमुख हवेली - 16634 वर्ग फुट
    • नम्मू बाड़ा - 2697 वर्ग फुट और 1816 वर्ग फुट, कुल 4513 वर्ग फुट
    • टीन पोश बंगला - 864 वर्ग फुट
    • जरहा बाड़ा - 1920 वर्ग फुट
    • कोठा, टीन व खप्पर - 2440 वर्ग फुट
    • कोठी, टीन व खप्पर - 7212 वर्ग फुट
    • राम सागर कोठी - 1080 वर्ग फुट
    • कुल क्षेत्रफल - 34663 वर्ग फुट

माखन साव परिवार के द्वारा विभन्न जगहों में सार्वजनिक धर्मशाला निर्माण

  1. शिवरीनारायण में महानदी खंड में महेश्वरनाथ मंदिर प्रांगण में एक धर्मशाला का निर्माण मुसाफिरों के लिए बनवाया गया था। इस धर्मशाला के सर्वराकार श्री आत्माराम साव थे।
  2. सारंगढ़ के खाड़ाबंध तालाब में एक सार्वजनिक धर्मशाला का निर्मएण कराया गया था जिसके सर्वराकार श्री आत्माराम साव थे। आगे चलकर इस धर्मशाला को समाज को दान कर दिया गया जिसमें ‘‘केसरवानी भवन‘‘ का निर्माण काराया गया है। केसरवानी भवन के निर्माण में माखन वंश के लोगों ने मुक्त हस्त से आर्थिक सहयोग किया है।
  3. शिवरीनारायण में माखन वंश के कमरीद परिवार से फुलवारी की जमीन को सार्वजनिक ‘‘केसरवानी भवन‘‘ के निर्माण के लिए समाज को दान कर दिया गया। यहां के अधिकांश कमरों के निर्माण में माखन वंश के लागों ने खूब आर्थिक सहायता की है।
  4. बम्हनीडीह में एक धर्मशाला का निर्माण लखुर्री परिवार के द्वारा कराया गया। इसके सर्वराकार साधराम रामचंद्र थे।
  5. बिर्रा रोड, सोंठी में एक धर्मशाला का निर्माण लखुर्री परिवार के द्वारा कराया गया था जिसके सर्वराकार श्री प्रयाग प्रसाद साव थे। इसे आगे चलकर श्री सदाशिवराव कात्रे को ‘‘कुष्ठ आश्रम‘‘ खोलने के लिए दान कर दिया गया।
  6. तालदेवरी में एक धर्मशाला का निर्माण कराया गया था जिसके सर्वराकार श्री रामचंद्र साव थे।
  7. कटनी में एक धर्मशाला का निर्माण कराया गया था।
  8. इलाहाबाद में एक धर्मशाला का निर्माण कराया गया था। मालगुजारी व्यवस्था के चलते तक धर्मशाला की मरम्मरत होती रही उसके बाद मरम्मत के लिए आर्थिक सहयोग नहीं मिलने से वहां के पंडों ने छत्तीसगढ़ के अन्य लोगों से सहयोग लेकर उसकी मरम्मत कराकर उसे आज ‘‘छत्तीसगढ़ धर्मशाला‘‘ नाम दे दिया गया है।
  9. केदारनाथ, बद्रीनाथ और जगन्नाथ पुरी में भी माखन वंश के द्वारा धर्मशाला का निर्माण कराया गया था लेकिन आगे मरम्मत कार्य के लिए आर्थिक सहयोग नहीं मिलने से या तो खंडहर हो गये या फिर अन्य लोगों से आर्थिक सहयोग लेकर उसका पुनर्निर्माण कराया गया।
  10. शिवरीनारायण के सभी कुओं का निर्माण माखन वंश के वंशजों के द्वारा कराया गया था।  इसीप्रकार सभी मालगुजारी गांवों में तालाब का निर्माण कराया गया था जिसका सार्वजनिक उपयोग और कृषि कार्य के लिए उपयोग किया जाता था। 


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